शनिवार, 22 अगस्त 2009

२१ अगस्त, चौपाल की पूर्वपीठिका


इस सप्ताह प्रकाश का फोन आया है कि वे भारत वापस लौट आए हैं। शुक्रवार को जब वे घर आए तो उनके हाथों में मोतीचूर के लड्डुओं का डिब्बा था, बेटी होने की खुशी में। उनका बेटा मनन चार साल का है बेटी का नाम उन्होंने मन्नत रखा है। प्रवीण जी, प्रकाश और मैं बहुत सी बातें करते रहे। भारतीय तरीके से मिल बैठना और हिंदी में लंबी बातचीत कर पाने का अपना आनंद है। हमने वह आनंद लूटा।

डॉ.उपाध्याय अभी तक भारत से लौटे नहीं हैं,एजाज़ पाकिस्तान में हैं। "जिस लाहौर नहीं वेख्या..." की तैयारी फिर से जारी है। निर्देशन का भार रिज़वी साहब के कंधों पर है। पहलवान की जो भूमिका पिछले अनेक सालों से एजाज़ कर रहे थे उनके अनुपस्थित होने के कारण सुनील कर रहे हैं। यू.एस. से उमेश अग्निहोत्री का ईमेल आया है। वाशिंग्टन के कैनेडी सेंटर में उनके निर्देशन में इस नाटक का सुंदर मंचन किया गया है। इस प्रतिष्ठित थियेटर में खेला जाने वाला यह पहला हिंदी नाटक है। कुछ चित्र भी उमेश जी ने संलग्न किए हैं। सुंदर लगते हैं। उसमें से दो छाँटकर यहाँ लगाती हूँ। लंदन में तेजेन्द्र जी से बात हुई। वे लोग ३ सितंबर को इस नाटक के २० साल पूरे होने के उपलक्ष्य में लंदन के नेहरू सेंटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। जिसके लिए वजाहत साहब लंदन जाने वाले हैं। भारत में सुप्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश भट्ट कमल के संपादन में १० सालों में एक बार प्रकाशित होने वाले हिंदी हाइकु के संग्रह में इस बार मध्यपूर्व के दो नए हाइकुकार हैं। बाहरीन की अर्बुदा ओहरी और दुबई की स्वाती भालोटिया। खुशी की बात है कि ये दोनों अभिव्यक्ति और चौपाल का भी हिस्सा भी हैं।

और भी बहुत सी बातें... थोड़ी देर में प्रकाश को सुनील का फ़ोन आया क्या आज चौपाल लग रही है? प्रकाश ने कहा चौपाल तो नहीं लगी है पर हम तीन यहाँ हैं। सुनील पास ही में कहीं थे। वे भी आ बैठे। लंबे दिनों से टूटे चौपाल का क्रम शुरू होने की पूर्वपीठिका तैयार सी हो गई। १९ अगस्त को हिंदुस्तान में एन.डी.टी.वी. के रवीश कुमार का शुक्रवार चौपाल पर एक लेख प्रकाशित हुआ है। मैंने उसकी एक प्रति प्रकाश को दी। प्रिंट कुछ छोटा था। लेख में अनुज का उल्लेख था। प्रकाश बोले कि वे और डॉक्टर साहब इस बार मुंबई में अनुज से मिलकर आए हैं और अनुज बहुत से कामों में व्यस्त हैं। बातों ही बातों में एक बज गया और सबने अपने अपने घर की राह ली। आशा है अगले शुक्रवार चौपाल लगेगी।

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