शनिवार, 19 सितंबर 2009

१८ सितंबर, सफल सप्ताह

यह सप्ताह चौपाल के बहुत से सदस्यों के लिए असीमित व्यस्तताओं से भरा रहा। रमज़ान की चहल-पहल, नौकरी की भाग-दौड़ और इस सब के साथ इंडियन स्कूल में कहानी संक्रमण की प्रस्तुति के लिए डॉ. उपाध्याय,प्रकाश, सबीहा और कौशिक को काफ़ी भागदौड़ का सामना करना पड़ा। अंतिम समय पर कल्याण और संग्राम भी सहयोग के लिए आ मिले तो प्रदर्शन अच्छा रहा। सब खुश थे। दूतावास से कौंसलाधीश और सांस्कृतिक सचिव की उपस्थिति ने अभिनेताओं को खासा रोमांचित किया। साथ के चित्र में प्रदर्शन से पहले ग्रीनरूम से बाएँ से डॉ.उपाध्याय, प्रकाश, संग्राम, सबीहा, कल्याण और त्रिवेणी। कौशिक तब तक पहुँचा नहीं था, सुबह की भाग दौड़ वाली व्यस्त सड़कों पर ट्रैफ़िक के बीच से उसका फ़ोन ज़रूर आ गया था। अच्छा यह रहा कि नाटक से पहले कुछ और भी कार्यक्रम थे और वह समय से पहुँच गया। प्रस्तुति के कुछ चित्र डॉ.उपाध्याय ने पिकासा पर यहाँ रखे हैं, कुछ लोगों को रोचक लगेंगे।

इस शुक्रवार चौपाल में बंगलुरु के रंगकर्मी और साहित्यकार मथुरा कलौनी के आतिथ्य का अवसर मिला। वे पिछले कई सालों से हिंदी रंगमंच के विकास में महत्त्वपूर्ण काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे नाटक, कविता और कहानियाँ भी लिखते रहे हैं। अभिव्यक्ति में भी उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। इस बार चौपाल में उनके हाल ही में मंचित नाटक खराशें की वीडियो रेकार्डिग देखाई गई। उनसे कविता सुनी और प्रकाश सोनी ने उनकी कहानी 'एक दो तीन' का पाठ किया। कहानी खासी रोचक थी और सबने इसका मज़ा लिया। बाद में सबने मिलकर खाना खाया। चौपाल में दो नाटकों की विशेष चर्चा रही। 'खराशें' और 'कब तक रहें कुँवारे'। दोनो ही नाटक मथुरा कलौनी जी के हैं। खराशें जहाँ राष्ट्रीय और सामाजिक समस्याओं को लेकर बुना गया विचारोत्तेजक नाटक है वहीं कब तक रहें कुँवारे हास्य व्यंग्य से परिपूर्ण है। कब तक रहें कुँवारे की एक कव्वाली काफ़ी रोचक रही थी। इस कव्वाली को यहाँ देखा जा सकता है। खराशें का एक दृश्य यहाँ देखा जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में हमने कलौनी जी को थियेटरवाला की ओर से प्रस्तुत कुछ नाटकों के सी.डी. भेंट किए। आज के कार्यक्रम में उपस्थित थे अतिथि साहित्यकार श्री मथुरा कलौनी, डॉ. शैलेश उपाध्याय, प्रकाश सोनी, सबीहा मजगाँवकर, कौशिक साहा, प्रवीण सक्सेना, दिलीप परांजपे, कल्याण चक्रवर्ती और त्रिवेणी शेट्टी।

नवरात्र हैं और डाँडिया की धूम इमारात में भी खूब रहती है। इस अवसर पर सबके मनोरंजन के लिए हमारे सदस्य दिलीप परांजपे ने अजमान बीच होटल में डाँडिया का आयोजन किया है। यह आयोजन इसलिए भी विशेष है कि यह शतप्रतिशत असली डाँडिया है जिसमें डाँडिया नचवाने वाला एक पारंपरिक ग्रुप भारत से बुलाया गया है। यानी सिर्फ रेकार्ड नहीं बजेंगे। लाइव संगीत होगा। 23, 24, 25 और 26 की शाम 9 से 12 तीन घंटे लगातार चलने वाले इस धूमधाम भरे कार्यक्रम में भाग लेने वालों के लिए विस्तृत जानकारी साथ के पोस्टर को क्लिक कर के देखी जा सकती है।

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