शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

४. फरवरी, ज्ञान प्रकाश विवेक की गवर्नेस


कुछ दिनों से मौसम बदला बदला सा है। आसमान में बादल हैं और कभी धूप तो कभी साया लगातार बनी हुई है। कल रुक रुक कर हल्की बारिश हुई। हवा में ठंड थी इसलिये चौपाल का प्रारंभ घर के भीतर से हुआ। सबसे पहले मीरा ठाकुर आईं हमने यूएई की हिंदी कविता के कुछ विशेष बिंदुओं पर बात की। दस मिनट में स्वरूपा राय भी आ गईं। स्वरूपा के लैपटाप पर हिंदी ठीक से काम नहीं कर रही। रीजनल भाषा विकल्प में जाकर हिंदी एक्टिवेट होने के बाद भी फाइल में डब्बे ही नजर आते रहे, अक्षर टाइप नहीं हुए। उन्होंने शाम को किसी विशेषज्ञ से समय ले लिया इसकी देखभाल का। पत्र लेखन और मुहावरों के विषय में चर्चा हुई।

इस बीच डॉ उपाध्याय आ गए थे। वे बाहर बैठे, धूप तेज निकल आई थी और हम लोग बाहर ज्ञान प्रकाश विवेक की कहानी गवर्नेस का पाठ करने बैठे। इतने में ही सुमित और बहुत दिनों के बाद अली भाई भी आ गए। कहानी अली भाई ने पढ़नी शुरू की, कहानी को अंतिम आधा भाग। डॉ. उपाध्याय ने पढ़ा। कहानी की कुछ ऐसा असर हुआ कि कुछ फिल्मों की ओर बात चल पड़ी। गुजारिश और तेरी सूरत मेरी आँखें। चाय पीकर सबने विदा ली। चित्र में बाएँ से अली भाई, डा. उपाध्याय, स्वरूपा राय, मैं और मीरा ठाकुर।

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