रविवार, 16 जनवरी 2011

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस वाला सप्ताह


इस पूरे सप्ताह आबूधाबी और दुबई में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस के कार्यक्रमों में चौपाल के सदस्य व्यस्त रहे। १४ जनवरी की शाम आबूधाबी के भारतीय दूतावास में थियेटरवाला द्वारा तैयार किये गए, दो नाटकों- 'दस्तक' और 'खिलजी का दाँत' का प्रदर्शन हुआ। असलम परवेज द्वारा लिखित नाटक 'दस्तक' का निर्देशन प्रकाश सोनी ने किया था और के.पी.सक्सेना द्वारा लिखित 'खिलजी का दाँत' का सबीहा मँझगाँवकर ने। दस्तक को थियेटरवाला द्वारा पहले भी मंचित किया जा चुका है, लेकिन खिलजी का दाँत की यह प्रथम प्रस्तुति थी। दोनो नाटकों की प्रस्तुत आकर्षक रही। सुनील जसूजा और ऊष्मा शाह द्वारा तैयार किया गया सेट रोचक और सुंदर बन पड़ा था। एक शाम थियेटर के नाम शीर्षक से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में दूतावास का थियेटर पूरा भरा रहा और दोनो नाटकों के विषय में दर्शकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही। मध्यांतर में परोसे गए चाय और समोसों ने वातावरण में भारतीयता की महक भर दी। अधिक फोटो अभी उपलब्ध नहीं हुए हैं, इसलिये झलक के रूप में खिलजी का दाँत नाटक की एक फोटो ही प्रस्तुत है। इस कार्यक्रम के कारण सुबह लगने वाली चौपाल स्थगित रही।

इसके पहले ७ जनवरी की शाम दुबई के कोरल देयरा होटल में महाराष्ट्र मंडल द्वारा मराठी के लोकप्रिय कवि और अभिनेता गुरू ठाकुर की हिंदी कविताओं की सीडी का लोकार्पण हुआ। सीडी में गुरू ठाकुर की आवाज भावों को अभिव्यक्त करने में सफल रही है। बीच बीच में योगिता चितले के आलाप अत्यंत कर्णप्रिय हैं। इस अवसर पर अलका तट्टू द्वारा गुरू ठाकुर का एक लंबा साक्षात्कार भी लिया गया जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया। साक्षात्कार के बीच बीच में गुरू ठाकुर के प्रसिद्ध गानों के वीडियो देखना रोचक रहा। कार्यक्रम में गायिका योगिता चितले भी उपस्थित रहीं। दाहिनी ओर के चित्र में कार्यक्रम के बाद का एक समूह चित्र।

ये दोनो कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किये गए।

शनिवार, 8 जनवरी 2011

७ जनवरी, पूर्वाभ्यास का दिन


इस बार शुक्रवार चौपाल के साहित्य सत्र में मोहन राकेश की कहानी पढ़ी गई - मिस पाल। इस सत्र में मेरे साथ पूर्णिमा वर्मन और स्वरूपा राय उपस्थित रहे। इसके साथ ही स्वरचित रचनाओं का पाठ हुआ और आनेवाले कार्यक्रमों के विषय में बातचीत हुई।

नाटक सत्र में दस्तक और खिलजी के दाँत का पूर्वाभ्यास जारी रहा। इस अवसर पर नाटक के सभी पात्र उपस्थित रहे।

प्रस्तुति- मीरा ठाकुर

शनिवार, 1 जनवरी 2011

३१ जनवरी २०१०, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस की तैयारियाँ


अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस के लिये १० जनवरी का दिन निश्चित किया गया है लेकिन सुविधानुसार यह सप्ताहांत की छुट्टी या उसके आसपास खिसकता रहता है। इस बार दिल्ली पब्लिक स्कूल की ओर से १६ जनवरी को शारजाह में, और १४ जनवरी को आबूधाबी में जो कार्यक्रम होने वाले हैं उनकी तैयारी का वातावरण रहा।


साहित्य सत्र में हरिकृष्ण सचदेव, स्वरूपा राय और अफरा के साथ जयशंकर प्रसाद की कामायनी के चिंता सर्ग का पाठ हुआ और इसके अर्थ पर विस्तार से चर्चा हुई। नाटक सत्र में दस्तक और खिलजी का दाँत पूर्वाभ्यास की सीढ़ी पर आगे बढ़े। इस सत्र में उपस्थित थे- प्रकाश सोनी, कौशिक साहा, सबीहा मँझगाँवकर, लक्ष्मण, सलाम, संग्राम और सुमित।

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

२४ दिसंबर, एक रचनात्मक दिन

२४ दिसंबर की शुक्रवार चौपाल में सुबह के पहले सत्र में कंप्यूटर पर इनस्क्रिप्ट टाइपिंग का अभ्यास हुआ, उदय प्रकाश को साहित्य अकादमी पुरस्कार की सूचना और उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर संक्षिप्त आलेख पढ़ा गया तथा आगामी साहित्य प्रतियोगिता के विषय में बातचीत हुई। पिछली चौपाल से हाइकु रचने की जो परंपरा शुरू हुई है उसे भी आगे बढ़ाते हुए नये हाइकु लिखे गए। नाटक सत्र में के.पी. सक्सेना के नाटक 'खिलजी का दाँत' का पूर्वाभ्यास हुआ। आज की चौपाल में मीरा ठाकुर, स्वरूपा राय, प्रकाश सोनी, कौशिक साहा, लक्ष्मण, अमीर, संजीव और सबीहा उपस्थित रहे।

शनिवार, 18 दिसंबर 2010

१० से १७ दिसंबर, गहमागहमी के दिन


यह सप्ताह लंबे अंतराल के बाद गहमागहमियों से भरा रहा। दो नाटकों के मंचन की तैयारी के साथ साथ भारत से पधारी डॉ सुरेखा ठक्कर द्वारा उनकी कहानी का भाव पाठ सुनने का सौभाग्य इमारात के साहित्य प्रेमियों को मिला। साथ ही काव्य रचना और आगामी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस के उपलक्ष्य के कार्यक्रमों की तैयारी शुरू हो गई।

शुक्रवार १० दिसंबर की गोष्ठी में पूर्णिमा वर्मन, प्रवीण सक्सेना, मीरा ठाकुर, नागेश भोजने, दिलीप परांजपे, सुप्रीत और प्रकाश सोनी ने भाग लिया। हाइकु के विषय में चर्चा हुई, भीष्म साहनी की कहानी सागमीट और शरद जोशी के व्यंग्य नाटक भक्त प्रह्लाद का पाठ किया गया।

बुधवार १५ दिसंबर को डॉ. सुरेखा ठक्कर के सम्मान में एक साहित्य संध्या का आयोजन किया गया। २८ वर्षों तक आकाशवाणी से जुड़ी सुरेखा ठक्कर संप्रति रायसोनी समूह के आई टी एम विश्वविद्यालय रायपुर में उपकुलपति के पद पर कार्यरत हैं। साहित्य संध्या में डॉ. सुरेखा ने अपनी कहानी 'परिचय' का भावपाठ किया। गोद ली गई एक बालिका की उपयोगितावादी परिणति इस कहानी को संवेदनात्मक धरातल पर गहराई से छूती है। इस कार्यक्रम में पूर्णिमा वर्मन, कुलभूषण व्यास्, अनुराधा, बबिता, कामना कटोच, नीता सोनी, राहुल तनेजा, मीरा ठाकुर, स्वरूपा राय, प्रवीण सक्सेना, इला प्रवीण, अनुभव गौतम, आन्या, सिद्धार्थ ठाकुर और अर्जुन उपस्थित रहे।

शुक्रवार १७ दिसंबर की शुक्रवार चौपाल में नागेश भोजने ने अपनी तीन कविताओं- आँखें, मन और पहचान, मीरा ठाकुर ने अपनी रचना इच्छा तथा पूर्णिमा वर्मन ने अपने दो गीत आवारा दिन तथा कोयलिया बोली का पाठ किया। इसके बाद सबने मिलकर हाउकु लिखने का अभ्यास किया। १३ जनवरी को आबूधाबी में दो नाटक खेलने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। जिसमें एक असलम परवेज का दस्तक होगा और दूसरा के पी सक्सेना का खिलजी का दाँत। दोनो नाटकों पर बातचीत और पूर्वाभ्यास हुए। आज की चौपाल में मेरे साथ प्रकाश सोनी, कौशिक साहा, सबीहा मझगाँवकर, सलाम, शुभजीत, पूर्णिमा वर्मन और नागेश भोजने शामिल रहे।


प्रस्तुति- मीरा ठाकुर

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

२६ नवंबर, आओ हिंदी की बात करें

इस बार शुक्रवार चौपाल का विषय था आओ हिंदी की बात करें। इसमें पूर्णिमा वर्मन, प्रवीण सक्सेना, नागेश भोजने, मीरा ठाकुर और नीता सोनी ने भाग लिया। संयुक्त अरब इमारात के भारतीय विद्यालयों के छात्रों में हिंदी के प्रति रूझान कैसे जागृत करें, इस विषय पर चर्चा हुई।

यह निश्चित किया गया कि छात्रों में अनुच्छेद लेखन के अभ्यास में से चुने हुए लेखों को अभिव्यक्ति में प्रकाशित किया जाए। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी से जुड़ने के लिये इंटरनेट के प्रयोग और निरंतर रचनात्मकता पर बल दिया गया। अंत में बी.बी.सी. द्वारा संडे के संडे’ कार्यक्रम में प्रसारित ‘भारतीयता की ओर अस्मिता की अधूरी कहानी’ इस पुस्तक लेखक पवन वर्मा के साथ राजेश जोशी की बातचीत का ऑडियो सुना गया तथा इस पर चर्चा भी हुई।

इस गोष्ठी में २ सूचनाएँ भी थी। पहली सूचना स्थानीय दिल्ली पब्लिक स्कूल में १६ दिसंबर को आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन की थी और दूसरी भारत से पधारने वाली रायपुर की कथाकार सुरेखा ठक्कर के दुबई आगमन की। चाय के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। गोष्ठी सुबह दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक चली।

प्रस्तुति- मीरा ठाकुर