शनिवार, 10 जुलाई 2010

९ जुलाई, वार्षिकोत्सव की तैयारियाँ


यह शुक्रवार रूहे इश्क की सफलता उत्सव के दूसरे दिन था इसलिये लोग कुछ देर से आए लेकिन सदस्यों की उपस्थिति अच्छी रही। काफ़ी लोगों के दर्शन हुए तो जोश और रौनक सबके चेहरों पर दिखाई दी। ऐसा नहीं था कि सभी लोग आए हों फिर भी बहुत दिनों बाद इतने लोग जमा हुए। सफल प्रदर्शन की प्रसन्नता सबके चेहरों पर झलक रही थी। कल के उत्सव का उल्लास अभी तक जारी था। इसी उल्लास के साथ थियेटरवाला के वार्षिकोत्सव की तिथि निश्चित की गई 6 अगस्त। यह उत्सव थियेटरवाला की स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यों तो यह तिथि 25 मई है लेकिन रूहे इश्क के प्रदर्शन और उसकी खिसकती हुई तिथियों के कारण वार्षिकोत्सव भी खिसकता हुई अगस्त में पहुँच गया है।


वार्षिकोत्सव के संयोजन का उत्तरदायित्व सबीहा और शालिनी को मिला है। कौन क्या कर रहा है यह लगभग तय है पर अभी कोई किसी को बताना नहीं चाहता। सब इसको रहस्य रखना चाहते हैं। आज उपस्थित लोगों में चित्र में दिखाई दे रहे हैं बाएँ से- शुभ, सबीहा, सलाम, डॉ. शैलेष उपाध्याय, दिलीप परांजपे, कौशिक, मैं, सुप्रीत, प्रकाश। इसके अतिरिक्त मूफ़ी, आमिर और शालिनी भी चौपाल में उपस्थित थे लेकिन कुछ देर से पहुँचने के कारण वे चित्रों में शामिल नहीं हो सके क्यों कि प्रवीण जी अपने कैमरे का बोरिया बिस्तर समेट चुके थे।

शनिवार, 3 जुलाई 2010

२ जुलाई, समीक्षा और योजना का दिन

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शुक्रवार चौपाल- में दो जुलाई का दिन पिछले प्रदर्शन की समीक्षा और आनेवाले कार्यक्रमों की योजनाएँ बनाने का रहा। केवल बातें ही नहीं पावर पॉइंट प्रस्तुति से भी कुछ नई परियोजनाओं ने चौपाल में पदार्पण किया। इन परियोजनाओं पर बहस भी हुई। इनमें से कितनी साकार होंगी और किस रूप में वह समय ही बताएगा। बहरहाल आज चौपाल में कुछ ऐसे चेहरे थे जो नियमित रूप से नहीं दिखाई देते- लक्ष्मण, शुभ, सुमित, आमिर और मूफ़ी। इनके सिवा कुछ अपेक्षाकृत नियमित लोगों में थे कौशिक और शालिनी। बाकी नियमित लोगों में से प्रकाश और डॉ उपाध्याय उपस्थित थे। चित्र में बाएँ से- मैं शालिनी, शुभ, प्रकाश, आमिर डॉक्टर साहब, मूफ़ी, कौशिक, सुप्रीत और लक्ष्मण जी। रूहे इश्क के चलते इस वर्ष थियेटरवाला का वार्षिकोत्सव नहीं मनाया जा सका। देखते हैं इस विषय में सबका क्या निर्णय होता है।

सोमवार, 28 जून 2010

२५ जून, प्रस्तुति रूहे इश्क की


अंततः प्रदर्शन का दिन आ ही गया। इस कार्यक्रम का विज्ञापन जोरदार हुआ था। टीवी और रेडियो पर दिये जानेवाले विज्ञापन आकर्षक थे। सबसे लोकप्रिय रेस्टोरेंट शृखला कामथ और गज़ीबो पर इनके टिकट बिके थे जिसका प्रभाव दर्शकों की भीड़ के ऊपर देखा जा सकता था। मल्हार के संगीत की प्रस्तुति से दर्शक आस्वस्त दिखे और थियेटरवाला के अभिनय ने उनका अच्छा साथ निभाया। कुल मिलाकर प्रस्तुति सफल रही। शायद इमारात में संगीत के साथ नाट्य अभिनय के संयोजन की यह पहली प्रस्तुति थी और प्रसन्नता की बात है कि दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया। प्रदर्शन के दिन चौपाल का लगना तो संभव नहीं होता। अतः चौपाल आज स्थगित रही।

शनिवार, 19 जून 2010

१८ जून, रूहे इश्क़ संपूर्णता की ओर...


जैसे जैसे 'रूहे इश्क' के प्रदर्शन के दिन समीप आ रहे हैं, पूर्वाभ्यास में भी गंभीरता आने लगी है। बृहस्पतिवार को देर रात तक पूर्वाभ्यास के कारण इस बार चौपाल स्थगित रही। शुक्रवार का पूर्वाभ्यास दुबई में हुआ दोपहर दो बजे से। दुबई शॉपिंग उत्सव के लिए आयोजित अनेक कार्यक्रमों में से एक यह कार्यक्रम 25 जून को होना निश्चित हुआ है। कार्यक्रम चार सूफ़ी संतों के गीतों और उनके जीवन की घटनाओं पर आधारित है। गीतों को मंच पर साकार करेंगे मल्हार के संगीतकार और गायक तथा जीवनवृत्त का नाट्य रूपांतर करेंगे थियेटरवाला के कलाकार।

रविवार, 13 जून 2010

११ जून, उत्सव सा दिन



आज का दिन उत्सव जैसा रहा। सदस्यों की उपस्थिति अच्छी थी। जमकर पूर्वाभ्यास हुआ और चाय के साथ बातचीत दमदार रही। आशा है प्रस्तुति भी इसी तरह दमदार रहेगी। मल्हार द्वारा तैयार किये जा रहे रूहे इश्क कार्यक्रम में संगीत तैयार है। रूमी और खुसरों के पूर्वाभ्यास से कलाकार संतुष्ट लगे। आज विशेष ध्यान बुल्लेशाह और कबीर के ऊपर रहा। बहुत दिनों बाद कौशिक और मूफ़ी दिखाई दिए।




बायीं ओर के चित्र में बीच में प्रकाश सोनी अपनी दाहिनी ओर आमिर और बायीं ओर सूत्रधार अली भाई के अभिनय को सराहते हुए- "वाह वाह क्या बात है की मुद्रा में।" ऊपर के चित्र में सामने की ओर बाएँ से प्रकाश और दोनो आमिर, पीछे की ओर बाएँ से मैं, शालिनी, अली भाई, कौशिक, डॉ. उपाध्याय, एक अन्य अभिनेता, सुमित और मूफ़ी। सदा की तरह फोटो प्रवीण जी ने ली।

शनिवार, 5 जून 2010

४ जून, रूहे-इश्क- इंतज़ार और अभी






चौपाल में रूहे इश्क का पूर्वाभ्यास जारी रहा। पहले इसका मंचन ११ जून को होने वाले था लेकिन कुछ कारणों से अब यह २५ जून को खेला जाएगा। जो लोग इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे उनके लिए प्रतीक्षा की घड़ियाँ बढ़ गई हैं लेकिन कलाकारों के पास अभ्यास का कुछ और समय हो गया है।

इसके साथ ही बदलती तिथियों में सभी कलाकार उपलब्ध हो सकेंगे या नहीं इसकी आशंका भी सिर उठाने लगी है। सभी महिला कलाकार आज अनुपस्थित रहीं (वे संगीत के पूर्वाभ्यास में अन्यत्र व्यस्त रहीं।) इसके बावजूद चौपाल में पूर्वाभ्यास जारी रहा। चित्रों में देखें अभ्यास की कुछ झलकियाँ।