शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

१५ अक्तूबर, अमृता प्रीतम और शरद जोशी


आज का दिन कहानियों का दिन था। सबसे पहले प्रकाश और अमीर पहुँचे। थोड़ी ही देर बाद डॉ लता, सुमित, ऊष्मा और सुनील भी आ गए। सबसे पहले शरद जोशी की व्यंग्य रचना सितार सुनने की पोशाक पढ़ी गई, उसके बाद अमृता प्रीतम की कहानी अपना अपना कर्ज पढ़ी गई, और अंत में शरद जोशी का एक और व्यंग्यात्मक रेखाचित्र पारसी थियेटर। कहानियाँ सुमित और डॉ लता की भी कम मजेदार नहीं थीं पर वे उनके निजी जीवन से संबंधित थीं। लेखकों की कहानियाँ भी तो दैनिक जीवन से की कहानियों से ही निकलती हैं... कोर्ट मार्शल के लिये पात्रों का चयन होना था पर वह शायद अगले सप्ताह हो। चित्र में बाएँ से मैं, डॉ लता, अमीर, सुमित, प्रवीण, प्रकाश और ऊष्मा। फोटो सुनील ने लिया है।

रविवार, 10 अक्टूबर 2010

८ अक्तूबर, छुट्टी का दिन

जब भी कभी किसी नाटक का मंचन होता है आमतौर से उसके बाद वाले शुक्रवार को चौपाल की छुट्टी रहती है। २ अक्तूबर को भारतीय कौंसलावास दुबई के रंगमंच पर प्रस्तुत नाटक के बाद परंपरानुसार ८ अक्तूबर को चौपाल में छुट्टी रही।

रविवार, 3 अक्टूबर 2010

१ अक्तूबर, महाप्रयाण का पूर्वाभ्यास एवं २ अक्तूबर को प्रदर्शन


इस शुक्रवार भरत याज्ञनिक के नाटक महाप्रयाण का रिहर्सल हुआ। इस नाटक के साथ थियेटरवाला ने कुछ नये प्रयोग शामिल किये हैं। नाटक का प्रारंभ पीछे पर्दे पर गाँधी जी के कुछ दृश्यों के साथ होता है। मूल नाटक खेला नहीं जाता है बल्कि अलग अलग माइकों पर पढ़ा जाता है। बीच की कुछ घटनाओं का मंचन किया गया है जिसमें गाँधी जी के बचपन की घटनाएँ शामिल हैं। पार्श्व संगीत और प्रकाश का प्रयोग कर के नाटक में जान डाली गई है। अंत के दृश्य में घटनाएँ पर्दे पर दिखाई देती हैं। प्रार्थना सभी का दृश्य बापू को गोली लगना और अंतिम संदेश का पार्श्व से सुनाई देना। ये सब नाटक की प्रस्तुति को रोचक बनाते हैं।

यह नाटक दुबई में भारतीय कौंसलावास के प्रेक्षाग्रह में २ अक्टूबर को खेला गया औॅर काफी सराहा भी गया। दुर्भाग्य से कैमरा घर पर रह गया इसलिये तुरंत कोई फोटो नहीं पोस्ट कर रही हूँ पर हमारी फोटोग्राफर आलिया के खींचे गए फोटो जैसे ही फेसबुक पर आएँगे यहाँ लिंक देने का प्रयत्न करूँगी। १ अक्तूबर को पूर्वाभ्यास के कुछ चित्र डा.उपाध्याय ने लिये थे इसमें से २ यहाँ प्रस्तुत हैं।

शनिवार, 25 सितंबर 2010

२४ सितंबर, प्रदर्शन का दिन


इस सप्ताह चौपाल पर भरत याज्ञिक के मूल गुजराती नाटक के हिंदी रूपांतर महाप्रयाण का पाठ किया गया। इस नाटक का जल्दी ही मंचन किया जाना है अतः कुछ पात्रों का चयन भी किया गया। इसके अतिरिक्त आज अभिनय और प्रदर्शन का दिन भी था। इस अवसर पर मिलिंद तिखे ने अपनी कहानी कदंब के फूल का पाठ किया और आमिर ने कुछ कविताएँ सुनाईं। शुभजित के मूक अभिनय ने सबका दिल जीत लिया। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में मिलिंद जी मिठाई लेकर आए थे जो चाय के साथ परोसी गई। आज उपस्थित सदस्यों में- दिलीप परांजपे, मुहम्मद अली, प्रकाश सोनी, डॉ. शैलेष उपाध्याय, नीलेश पटेल, विक्रम शर्मा, सुमित, शुभजीत, मिलिंद तिखे, आमिर और सुनील के साथ मैं और प्रवीण भी शामिल रहे।

शनिवार, 18 सितंबर 2010

१७ सितंबर, दो उर्दू कहानियाँ



इस सप्ताह चौपाल पर पढ़ी गई दो उर्दू कहानियों के हिंदी रूपांतर- कृष्णचंदर की वैक्सिनेटर और सआदत हसन मंटो की टोबा टेक सिंह। पिछले कुछ महीनों से थियेटरवाला की नियमित मासिक प्रस्तुतियों में व्यवधान बना हुआ है। इस विषय पर चर्चा हुई और इसको दूर करने के उपायों पर विचार किया गया। अली भाई आज की चौपाल में बहुत दिनों बाद दिखाई दिये। अन्य उपस्थित सदस्यों में चित्र में बाएँ से- एक पुराने सदस्य जो बहुत दिनों बाद आए इसलिये नाम याद नहीं आ रहा, सुमित, प्रकाश, अली भाई, मिलिंद तिखे, डॉ. उपाध्याय और मैं। प्रवीण जी की अनुपस्थिति में चित्र शुभजीत ने लिया।

शनिवार, 4 सितंबर 2010

३ सितंबर, भरत याज्ञनिक का महाप्रयाण


चौपाल में इस बार भरत याज्ञनिक के नाटक महाप्रयाण का पाठ हुआ। प्रकाश छु्ट्टी मनाकर दो सप्ताह के बाद भारत से लौटे हैं तो चौपाल में रौनक दिखाई दी। लवी और दीपक नाम के दो नये चेहरे भी थे। हमेशा उपस्थित रहने वाली सबीहा इस बार अनुपस्थित रहीं। मालूम नहीं नाटक राजनीतिक होने के कारण या उसमें गाँधी की उपस्थिति होने के कारण पाठ के बाद कुछ गरमागरम राजनीतिक बहसें भी हुईं। कुल मिलाकर चौपाल में रौनक रही। चित्र में बाएँ से- दिलीप परांजपे, मिलिंद तिखे, डॉ. शैलेष उपाध्याय, शुभजीत प्रकाश, लवी और दीपक। इसके अतिरिक्त आज चौपाल में मैं, प्रवीण सक्सेना और कौशिक साहा भी उपस्थित थे।