शनिवार, 19 मार्च 2011

१८ मार्च, होली का दिन

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शुक्रवार चौपाल में इस सप्ताह पर्व की गुनगुनाहट रही। साहित्य सत्र में सुबह नागेश भोजने और मीरा ठाकुर पहुँचे। दोनो ने होली पर हाइकु लिखकर दिन का शुभारंभ किया।

नाट्य सत्र में सबसे पहले पहुँचने वालों में थे सबीहा और डाक्टर उपाध्याय। फिर प्रकाश और आमिर पहुँचे। धीरे धीरे कौशिक, नीरू, सुमित, नीलेश और समीर भी आ गए। कार्यक्रम का प्रारंभ गोपाल प्रसाद व्यास की हास्य कविताओं से हुआ। फिर मैंने अपनी कविता सुनाई रंग और फिर मीरा और नागेश जी ने अपने अपने हाइकु सुनाए।

मीरा काजूकतली का एक डिब्बा लेकर आई थीं। साथ ही था एक डिब्बी में लाल गुलाल। संभ्रांत सी होली गुलाल के साथ हो गई। और चाय के साथ मिठाई नमकीन के साथ चौपाल पूरी हुई। दाहिनी ओर चित्र में बाएँ से नीरू, सबीहा, डॉ. उपाध्याय, आमिर, समीर, सुमित, पीछे की ओर छुपे हए नागेश भोजने, नीलेश, कौशिक और प्रकाश।

शनिवार, 5 मार्च 2011

४ मार्च, एक अनूठी प्रेम कहानी का दूसरा अंक

इस सप्ताह चौपाल में प्रेमचंद गाँधी के नाटक एक अनूठी प्रेम कहानी का दूसरा भाग पढ़ा जाना था। मालूम नहीं इस बार क्यों थियेटरवाला की कार्यक्रम सूचना वाली ईमेल नहीं पहुँची। साहित्य सत्र के कुछ प्रमुख सदस्य भारत गए हुए हैं, लगा था कि वह सत्र स्थगित हो जाएगा। हालाँकि नीता सोनी का फोन आया था, वे आने का समय निकाल सकी थीं, लेकिन फिर यही तय हुआ कि हम अगली बार मिलें। मैं भी आराम से अभिव्यक्ति का कुछ काम निबटाने बैठी थी कि प्रकाश सोनी, डा. शैलेष उपाध्याय और शुभजित आ पहुँचे। फिर तो जम गई चौपाल। थोड़ी देर में सबीहा और सु्प्रीत भी आ पहुँचे। नाट्यपाठ शानदार रहा। २३ मई को थियेटरवाला का स्थापना दिवस है। इसके उपलक्ष्य में एक नाटक और रात्रिभोज के कार्यक्रम का विचार है। इस अवसर पर कौन सा नाटक खेला जाए इस पर निर्णय अभी नहीं लिया गया है पर हो सकता है कि अनूठी प्रेम कहानी ही आकार ले। चित्र में बाएँ से शुभजीत, मैं, सबीहा, सुप्रीत (खड़े होकर पढ़ते हुए, प्रकाश सोनी और डॉ. उपाध्याय। चित्र प्रवीण सक्सेना ने लिया।

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

१८ फरवरी, प्रेमचंद गांधी की 'एक अनूठी प्रेम कहानी'


साहित्य सत्र के सदस्य इस बार व्यस्त रहे। नाटक सत्र में जयपुर के कवि और रंगकर्मी प्रेमचंद गांधी का नाटक एक अनूठी प्रेम कहानी का नाट्य पाठ हुआ। इस नाटक की मूल कथा हरिशंकर परसाईं की रचना राजकुमारी नागफनी की कहानी पर आधारित है। समय कम होने के कारण एक अंक का पाठ ही हो सका पर इसके हास्य व्यंग्य ने सबका भरपूर मनोरंजन किया। नाटक सबको पसंद आया है। इसके मंचन के विषय में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। आज की चौपाल में उपस्थित रहे- चित्र में बाएं से सुमित, प्रकाश सोनी, गीतू, , सबीहा, मैं, डॉ. शैलेष उपाध्याय और शुभजीत। चित्र प्रवीण सक्सेना ने लिया। गीतू द्वारा लाए गए डोनट्स चाय के साथ मजेदार रहे।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

४. फरवरी, ज्ञान प्रकाश विवेक की गवर्नेस


कुछ दिनों से मौसम बदला बदला सा है। आसमान में बादल हैं और कभी धूप तो कभी साया लगातार बनी हुई है। कल रुक रुक कर हल्की बारिश हुई। हवा में ठंड थी इसलिये चौपाल का प्रारंभ घर के भीतर से हुआ। सबसे पहले मीरा ठाकुर आईं हमने यूएई की हिंदी कविता के कुछ विशेष बिंदुओं पर बात की। दस मिनट में स्वरूपा राय भी आ गईं। स्वरूपा के लैपटाप पर हिंदी ठीक से काम नहीं कर रही। रीजनल भाषा विकल्प में जाकर हिंदी एक्टिवेट होने के बाद भी फाइल में डब्बे ही नजर आते रहे, अक्षर टाइप नहीं हुए। उन्होंने शाम को किसी विशेषज्ञ से समय ले लिया इसकी देखभाल का। पत्र लेखन और मुहावरों के विषय में चर्चा हुई।

इस बीच डॉ उपाध्याय आ गए थे। वे बाहर बैठे, धूप तेज निकल आई थी और हम लोग बाहर ज्ञान प्रकाश विवेक की कहानी गवर्नेस का पाठ करने बैठे। इतने में ही सुमित और बहुत दिनों के बाद अली भाई भी आ गए। कहानी अली भाई ने पढ़नी शुरू की, कहानी को अंतिम आधा भाग। डॉ. उपाध्याय ने पढ़ा। कहानी की कुछ ऐसा असर हुआ कि कुछ फिल्मों की ओर बात चल पड़ी। गुजारिश और तेरी सूरत मेरी आँखें। चाय पीकर सबने विदा ली। चित्र में बाएँ से अली भाई, डा. उपाध्याय, स्वरूपा राय, मैं और मीरा ठाकुर।

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

२८ जनवरी, गणतंत्र दिवस का दिन



आज की चौपाल में गणतंत्र दिवस मनाना निश्चित हुआ था। साहित्य सत्र में सबसे पहले पहुँचे दिगंबर नस्वा और उनकी पत्नी अनीता, फिर नागेश भोजने मीरा ठाकुर, प्रकाश सोनी, शुभजीत और सुप्रीत भी आ गए। कार्यक्रम का शुभारंभ मीरा ठाकुर की कविताओं से हुआ फिर नागेश भोजने ने कुछ कविताएँ पढ़ीं और उसके बाद दिगंबर जी ने। दिगंबर नस्वा जी की रचनाओं में देशभक्ति के गीतों के साथ हास्य व्यंग्य की छंदमुक्त रचनाओं और जीवन से संबंधित गजल के रंग भी देखने को मिले। मेरे कविता पाठ के बाद प्रकाश ने शरद जोशी का एक व्यंग्य पढ़ा। चाय के बाद दूसरे सत्र में प्रकाश शुभजीत और सुमित ने परमानंद गजवी के नाटक गाँधी-अंबेडकर का नाट्य पाठ किया।

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर कुछ और कार्यक्रम


इस शुक्रवार चौपाल में विगत सप्ताह के कार्यक्रमों का लेख जोखा ही प्रमुख विषय रहे। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस की धूम जो ७ जनवरी को प्रारंभ हुई थी, १६ जनवरी तक जारी रही। १६ जनवरी को शारजाह के डीपीएस स्कूल में हिंदी कविता से संबंधित परंपरा नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी तैयारी पिछले लगभग एक महीने से जारी थी। कार्यक्रम में संयुक्त अरब इमारात के भारतीय विद्यालयों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध रचनाकार मुनव्वर राणा भारत से शारजाह पधारे थे। इस अवसर पर इमारात में हिंदी के क्षेत्र में जानेमाने नाम- कृष्ण बिहारी, दिगंबर नस्वा, प्रदीप लालजानी, कुलभूषण व्यास, रिक्तेश श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन तथा प्रस्तुति आकर्षक रही, विद्यार्थियों का प्रदर्शन संतोषजनक था, सांस्कृतिक कार्यक्रम सुरुचिपूर्ण रहा और विजेता विद्यार्थियों/विद्यालयों को पुरस्कार वितरित किये गए।