शनिवार, 28 मई 2016

डॉ. शिबेनकृष्ण रैणा के सम्मान में काव्य गोष्ठी

शारजाह, शुक्रवार, 27 मई दोपहर 3 बजे आयोजित होने वाली गोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गयी। गोष्ठी के मुख्य अतिथि थे भारत से पधारे डॉ. शिबेनकृष्ण रैणा और उनकी पत्नी श्रीमती हंसा रैणा। कार्यक्रम में श्री सत्यभान ठाकुर, श्रीमती मीरा ठाकुर, श्री अवधेश गौतम, श्रीमती ऋचा गौतम, श्री कुलभूषण व्यास, श्रीमती अनुराधा व्यास, श्रीमती शांति व्यास, श्री नागेश भोजने, श्री संतोष कुमार, श्री आलोक चतुर्वेदी, श्रीमती शिवा चतुर्वेदी, श्रीमती ऋतु शर्मा, श्री प्रवीण सक्सेना और श्रीमती पूर्णिमा वर्मन ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

सबसे पहले उपस्थित रचनाकारों ने एक दूसरे से परिचय प्राप्त किया और उसके बाद रचना पाठ का कार्यक्रम हुआ। श्री आलोक चतुर्वेदी ने देश, समाज और व्यक्तित्व के उत्थान से ओतप्रोत, गीत शैली की रचनाएँ पढ़ीं जिसे सभी ने सराहा। श्रीमती ऋतु शर्मा की रचनाएँ छंदमुक्त शैली में थी और जीवन के विविध आयामों एवं राजनीतिक चेतना से संबंधित थीं। इन्हें सभी की प्रशंसा मिली। श्री संतोष कुमार की रचनाओं में जीवन के सुख-दुःख को बहुत ही सहजता से रूपायित किया गया था। जबकि श्री नागेश भोजने की कविताओं में जीवन के रंगों में हास्य व्यंग्य का रोचक पुट था। दोनो की छंदमुक्त रचनाओं का सभी ने स्वागत किया। पूर्णिमा वर्मन की रचना मौसम माहौल और मन पर केंद्रित रहीं जिसमें प्रकृति चित्रण, व्यंग्य और मनोरंजन मिला जुला था।

श्री कुलभूषण व्यास के दोहे आदर्शवादिता के सुंदर नमूने थे जो सभी को रुचिकर लगे। श्रीमती ऋचा गौतम की गजल ने गोष्ठी में संगीत का तड़का लगाया और डॉ शिबेनकृष्ण रैणा ने गलतफहमी और खुशफहमी की व्याख्या करने वाला एक रोचक लेख पढ़ा जिसकी व्यंग्यातमक तरंगों के कारण अंत में लोग हँसे बिना न रह सके। अंत में चाय पान के बाद फोटो सेशन हुआ और विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई जिसमें सपनों के उद्भव उनके भविष्य और उनके वैज्ञानिक तथ्यों पर चर्चा हुई। कुछ लोगों ने अपने रोचक सपनों के विषय में भी बताया जो आगे चलकर सच साबित हुए। इसी में एक रोचक स्वप्न श्रीमती हंसा रैणा का था। डॉ शिबेन कृष्ण रैणा ने अपने पितामह द्वारा संकलित कश्मीर के शैव स्तोत्रों के विषय में भी चर्चा की। कुल मिलाकर गोष्ठी सफल और ज्ञानवर्धक रही।

सोमवार, 11 जून 2012

काव्य-संध्या के आकर्षक पल


पिछले कुछ महीनो से लगातार यात्राओं के कारण शुक्रवार चौपाल बंद सी है। लेकिन जो थोड़ा बहुत समय मिला है उसमें इमारात के भारतीय विद्यालयों के हिंदी अध्यापकों में छुपी रचना प्रतिभा को निकालकर बाहर लाने का अभूतपूर्व काम हो सका है। इस गुरुवार की शाम इन प्रतिभाओं को समर्पित एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री विश्वंभरनाथ पांडेय राहगीर बनारसी थे। वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी और हिंदी तथा भोजपुरी साहित्य में लोक कवि के रूप में महत्त्वपूर्ण स्थान रखने वाले, अनेक सम्मानों से सुशोभित श्री राहगीर बनारसी जी पिछले कुछ दिनो से इमारात में अपनी बेटी के पास रह रहे हैं। अनेक बार विश्व का भ्रमण कर चुके इस अद्भुत रचनाकार ने अपने रोचक अनुभव सुनाकर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का आरंभ डैरिक रोस्टन ने अपनी मधुर आवाज में  सरस्वती वंदना से किया, सबने एक दूसरे का परिचय प्राप्त किया। दो प्रमुख वक्ताओं कुलभूषण व्यास ने प्रेरक कविताओं के संग्रह की योजना और अभिमन्यु गिरि ने सितंबर माह में होने वाली हिंदी प्रसार सभा की परियोजनाओं की सूचना दी जो  उपस्थित हिंदी प्रेमियों के लिये अत्यंत हर्ष की बात थी। पिछले अनेक सालों से ये दोनो हिंदी प्रेमी, हमारी राजभाषा  के विकास में महत्वपूर्ण योग दान दे रहे हैं। पूर्णिमा वर्मन ने संचालक के पद से बोलते हुए कहा कि अब संयुक्त अरब इमारात के हिंदी कवियों का एक संकलन निकलने का समय आ पहुँचा है और आने वाले सितंबर तक इसे तैयार हो जाना चाहिये। 

कविता पाठ का आरंभ श्री नंदी मेहता ने किया इसके बाद अभिमन्यु गिरि,  कुलभूषण व्यास, राजन सब्बरवाल, धर्मेन्द्र चौहान, डैरिक रोस्टन, मनोज शर्मा, राहुल तनेजा, श्रीमती अमृता कौर, मीरा ठाकुर,  श्री एन. एच. भोजने, पूर्णिमा वर्मन तथा अंत में राहगीर बनारसी सभी ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ  किया।  कार्यक्रम मेँ श्रीमती स्वरूप राय, श्रीमती कामना कटोच, श्रीमती मंजु सिंह, श्रीमती शालू चिंपा, श्रीमती ऋचा गौतम, श्रीमती मीना, श्री प्रवीण सक्सेना तथा अनुभव व इला गौतम सहित इमारात के भारतीय विद्यालयों के लगभग ४० हिंदी अध्यापक एवं उनके परिवार उपस्थित थे। यह गोष्ठी रात ११ बजे तक सानंद चलती रही। काव्य संध्या के अंत में मीरा ठाकुर द्वारा आयोजित जलपान ने सबको तृप्त किया।  

रविवार, 25 मार्च 2012

२३ मार्च, हिंदी प्रसार सभा के साथ

इस बार शुक्रवार चौपाल हिंदी प्रसार सभा के सदस्यों के साथ जमी। गोष्ठी का आरंभ कनक शर्मा ने नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ किया और बगीचे में सुंदर फूलों वाला एक पौधा रोपा। गोष्ठी में उपस्थित रहे अभिमन्यु गिरि, कनक व अशोक शर्मा, आलोक शर्मा मैं और प्रवीण सक्सेना। बातचीत के लिये महत्वपूर्ण विषय था अगले कार्यक्रम की तैयारी का। इसकी विस्तृत रूपरेखा और काम का बँटवारे का काम इस गोष्ठी में पूरा हुआ। कार्यक्रम में एक नाटक और कुछ संगीत शामिल कर के एक सांस्कृतिक प्रस्तुति बनाई गई है।

इसके अतिरिक्त अगले बोलचाल क्लब के विषय में बातचीत हुई। हिंदी प्रसार सभा की माह में एक गोष्ठी होती हैं जिसमें दिये गए विषय पर बोलने का अभ्यास कराया जाता है। गोष्ठियाँ साप्ताहिक छुट्टी के दिन यानी शुक्रवार की दोपहर को होती हैं। शाम तक कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। पिछली गोष्ठी का विषय था- संवाद और नेतृत्व। गोष्ठी रोचक और मनोरंजक थी। अगली गोष्ठी का विषय मातृत्व है। सदा की तरह सुमन इसकी तैयारियों में व्यस्त हैं।  चित्र में बाएँ से प्रवीण, अभिमन्यु, कनक, मैं और आलोक जी। ऊपर के चित्र में आलोक और अशोक की विचार विमर्श में मग्न। ऊपर का  चित्र प्रवीण सक्सेना और नीचे का अशोक शर्मा के सौजन्य से।

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

४ नवंबर, श्रीलाल शुक्ल को श्रद्धांजलि


यह शुक्रवार दिवंगत लेखक श्रीकांत शुक्ल को श्रद्धांजलि देने का दिन था। डॉ उपाध्याय ने श्रीलाल शुक्ल का परिचय पढ़ा तथा प्रकाश यश विभा और मैंने उनकी कुछ व्यंग्य रचनाओं का पाठ किया। इसके बाद एक घोड़ा तीन सवार नाटक का पहला अंक पढ़ा गया। आज उपस्थित सदस्यों में थे- प्रकाश सोनी, डॉ. उपाध्याय, यश, विभा, मेनका, सादिया, राजन सब्बरवाल, सबीहा और मैं।

शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

२८ अक्तूबर, रानी नागफनी की कहानी के साथ एक कदम और...

चौपाल में नए नाटक को लेकर उत्साह है। लोग धीरे धीरे आए लेकिन एक घंटे में काफ़ी लोग जमा हुए। तीन दृश्यों का पाठ हुआ और बहुत सी बातें। आशा रखें कि ये बातें कार्यरूप में आकार लें।

आज उपस्थित सदस्यों में थे- प्रकाश सोनी, सबीहा मझगाँवकर, डॉ. शैलेष उपाध्याय, राजन सभरवाल, मेनका, मीरा ठाकुर, सादिया नूरी, सलाम, लक्ष्मण, नीलेश, संजय ग्रोवर, मोहम्मद अली और सुमित।

शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

२१ अक्तूबर, एक बहस और

इस शुक्रवार को चौपाल में बहुत महीनों बाद बहुत से लोग जुटे। बहुत से लोगों को देखना अच्छा लगता है। लेकिन अच्छा लगने से आगे बढ़कर कुछ कर गुजरने के लिये जिस लगन और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है वह पिछले कई महीनों से देखने में नहीं आरही है। शायद बहुत से काम के बाद एक लंबे विश्राम का समय है।  आशा करें कि सब इस विश्राम के विवर से बाहर निकलें और कर्मठता के शिखर पर चढ़ें।



नाटकों के पूर्वाभ्यास और उनके मंचन के बीच सैकड़ों समस्याएँ और उनके बहुत से हल। बहुत सी शिकायते बहुत से सवाल, बहुत से वादे बहुत से जवाब।  ऐसा नहीं कि इससे पहले ये बातें हुई नहीं फिर भी बार बार बातों की गुंजाइश बनी रहती है। कुछ आगे की योजनाएँ बन गईं। बातें सफल हुईं या असफल यह समय बताएगा और योजनाएँ आकार लेती हैं या नहीं यह भी।

कुल मिलाकर रोचक बात यह रही कि अली भाई और प्रकास सोनी ने एक अनूठी प्रेम कहानी के पहले अंक का पहला दृश्य पढ़ा जो सुनने में बहुत रोचक लगा। आज उपस्थित लोगों में थे- प्रकाश सोनी, अली भाई, डॉ. उपाध्याय, सबीहा, मेनका, सादिया, रायन, संजय ग्रोवर, सुमित, राजन सभरवाल, कल्याण, सलाम, मैं और प्रवीण।