शुक्रवार २४ दिसंबर २०२१ को पाँच साल बाद चौपाल लगी। उसी घर में उसी मेज के चारों ओर... पिछले दो साल तो इमारात आना ही नहीं हुआ। और उसके पहले चार साल... बहुत ही कठिन संघर्षों से गुजरे। मिलने मिलाने का समय ही नहीं मिला।
काव्य गोष्ठी के अंत में करुणा राठौर की मसालेदार चाय ने सबका दिल जीत लिया। हमेशा की तरह बिना फोटो के कैसे काम चलता। कुछ किताबों के विमोचन हुए और सबके फोटो लिये गए। वादा किया कि विश्व हिंदी दिवस के दिन फिर भेंट होगी। आशा है कि अधिकतर लोग अपने वादे को निभा सकेंगे। सबसे ऊपर वाला फोटो आलोक कुमार शर्मा के कैमरे से यही कारण है कि वे उसमें दिखाई नहीं दे रहे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें