शनिवार, 9 अप्रैल 2011

७. अप्रैल, कुछ और कहानियों का पाठ


इस सप्ताह कार्यक्रम था उर्दू की कहानियाँ पढ़ने का। इसके साथ ही प्रेमचंद की कहानी बड़े भाई साहब के एक और प्रदर्शन के लिये पूर्वाभ्यास भी आरंभ करना था।

कुछ सदस्य एक फ़िल्म बनाने में लगे हैं। उन्हें भी कुछ विचार विमर्श करना था। इन सभी बातों के साथ इस बार की चौपाल जमी। सबसे पहले मीरा ठाकुर और नागेश भोजने पहुँचे। उनकी दो नई रचनाएँ पढ़ी जानी थीं।

धीरे नाटक सत्र के लोग आने लगे। सबसे पहले प्रकाश सोनी पहुँचे, फिर डॉ. उपाध्याय, उसके बाद कौशिक नीरू, सुमित, आमिर, सिरीन आदि पहुँचे। ऊपर के चित्र में बाएँ से डॉ उपाध्याय, कौशिक, सिरीन, नीरू, मीरा, पीछे छुपे हुए नागेश भोजने और प्रकाश।

1 टिप्पणी:

  1. पूर्णिमा जी देश से दूर रह कर आप हिंदी साहित्य को अच्छा बढ़ावा दे रही हैं...
    शुक्रिया......आप की नि: स्वार्थ सेवा के लिए......बहुत अच्छा कर रही हैं......
    अगर आपको कभी समय मिले तो कृपया मेरे..notes भी पढने का कष्ट करियेगा........एक छोटा सा प्रयास मेरा भी है.......
    धन्यवाद और शुभकामना के साथ

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