शनिवार, 2 अप्रैल 2011

१ अप्रैल, अमृता प्रीतम की कहानियाँ


इस सप्ताह कार्यक्रम था अमृता प्रीतम की कहानियों का। कुल मिलाकर उनकी छह कहानियाँ पढ़ी गईं। बृहस्पतिवार का वृत, और नदी बहती रही, यह कहानी नहीं, साहिबाँ आई थी, माँ शारदा और कुदरत की करवटें। आनेवालों में सबसे पहले पहुँची मीरा ठाकुर जो अपने ताजे लिखे १९ हाइकु सबके साथ बाँटे, उसके बाद पहुँचे प्रकाश सोनी और डॉ. उपाध्याय। कहानी पाठ आरंभ किया प्रकाश ने फिर मीरा ने दूसरी कहानी पढ़ी। इस बीच नीरू और सुनील पहुँच गए। सबसे बाद में कौशिक पहुँचे। बाकी कहानियाँ डॉ. उपाध्याय, नीरू, कौशिक और सुनील ने पढ़ीं।

सुनील ने भारत में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के विरोध में लाए जाने वाले लोकपाल विधेयक और उसके समर्थन में अन्ना हजारे द्वारा ५ अप्रैल को आमरण अनशन के विषय में जानकारी दी। अनेक साथियो ने निश्चय किया है कि वे भी ५ अप्रैल को उनके समर्थन में उपवास और प्रार्थना में रहेंगे। चित्र में बाएँ से डॉ. उपाध्याय, नीरू, मीरा ठाकुर, सुनील जसूजा और प्रकाश सोनी। जिस समय फोटो लिया गया मैं चाय बनाने गई थी, कौशिक तब तक पहुँचे नहीं थे और फोटो प्रवीण सक्सेना ने लिये इसलिये ये तीनों चित्र में नदारद हैं।

4 टिप्‍पणियां:

  1. अम्रता प्रीतम कि कहानियों का कहानी पाठ हुआ जानकर अच्छा लगा!ये आयोजन कहाँ हुआ था?

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  2. शुक्रवार चौपाल शारजाह में प्रति शुक्रवार सुबह 10:30 से दोपहर 1 बजे तक लगती है।

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  3. अच्छा लगा ....बहुत अच्छा हो अगर इसकी वीडियो भी अपलोड की जाये तो विदेश में बैठे हम जैसे लोग भी आनंदित हो सकें

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  4. मैं इस विषय में सदस्यों से बात करूँगी।

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